महर्षि मेँहीँ शब्दकोश की प्रसतावना || Introduction to the Maharshi Mehi Dictionary
महर्षि मेँहीँ शब्दकोश परिचय: Maharshi Mehi Dictionary Intro
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| ॥ ॐ श्रीसद्गुरवे नमः ॥ |
प्रभु प्रेमियों ! संतमत साहित्यों में सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज के साहित्यों में और उनके सत्संग मंदिरों में दिए गए पिंड ब्रह्मांड के सांकेतिक नक्शे में लिखे गए शब्दों को समझना बड़ा कठिन और गहन अध्ययन मनन का काम था । जिस पर पूज्यपाद लालदास जी महाराज ने बहुत गंभीरता से काम करके सर्वसाधारण के समझने योग्य उन शब्दों के शब्दकोश वनाया। उनका अर्थ किया और उसे कई तरह के पुस्तकों में लिखें । जैसे- संतवाणी सटीक, महर्षि मेँहीँ पदावली, पिंड माही ब्रह्मांड इत्यादि । उन सभी पुस्तकों से उन सभी अर्थों को एकत्रित करके यह शब्दकोश का निर्माण किया गया है। इसमें लगातार शब्दों की वृद्धि हो रही है । अब तक इसमें 6621 से भी अधिक शब्द हो चुके हैं ।
महर्षि मेँहीँ डिजिटल शब्दकोश की विशेषताएं
यहाँ इस पुस्तक में वर्णित उन सभी शब्दों का आपको वर्णन मिलेगा और आपके आध्यात्मिक यात्रा में अब गंभीर, परिभाषिक या संतों के कोड वर्ड शब्दों को समझना कठिन नहीं रहेगा । क्योंकि इस महर्षि मेँहीँ डिजिटल शब्दकोश में उन प्रसंगों को भी शामिल किया जाएगा, जहां पर इन शब्दों का प्रयोग किया गया है । इस काम में हमें gemini का सहायता लेना पड़ा है । मैं ब्लॉग एडिटर हूं।
शब्दकोश का निर्माण करना एक अत्यंत कठिन और चिंतन-मनन का कार्य है। **महर्षि मेँहीँ-शब्दकोश** के लेखक श्री **छोटेलाल दास** जी के अनुसार, शब्दों को केवल अक्षरों के क्रम में सजाना सरल हो सकता है, लेकिन उन्हें मात्राओं के सही क्रम में बैठाना एक बड़ी चुनौती थी।
शब्दकोश की विशेषताएं
- स्रोत: इसमें अधिकांश शब्द सद्गुरु पूज्यपाद महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज की पुस्तकों से लिए गए हैं।
- अन्य स्रोत : (संतमत के साहित्यों, भजनों एवं अन्य अध्यात्मिक स्रोतों के कठिन शब्दों का भी संकलन किया जा रहा है। )
- भाषा: इसकी भाषा को बहुत ही सरल रखा गया है ताकि हर साधक इसे समझ सके।
- विविधता: इसमें संस्कृत, हिन्दी, अंग्रेजी और उर्दू के अनेक शब्दकोशों की सहायता ली गई है।
- भारती (हिन्दी) प्रधान: जिस शब्द के आगे भाषा का निर्देश नहीं है, उसे हिन्दी का शब्द समझना चाहिए।
सांकेतिक अक्षरों का स्पष्टीकरण
पूँ० = पुँल्लिंग । स्त्री० = स्त्रीलिंग । वि० = विशेषण । वि० पुं० = विशेषण पुँल्लिंग । वि० स्त्री० = विशेषण स्त्रीलिंग । क्रि० वि० = क्रियाविशेषण । अव्य० अव्यय। प्रत्य० = प्रत्यय। उप० = उपसर्ग। सार्व० वि० = सार्वनामिक विशेषण। सर्व० = सर्वनाम । अ० क्रि० = अकर्मक क्रिया । स० क्रि० = सकर्मक क्रिया । हिं० = हिन्दी । सं० = संस्कृत । अ० = अरबी । फा० = फारसी । अँ० = अँगरेजी ।
निर्माण में सहयोग
इस महान कार्य को पूर्ण करने में लेखक को कई वर्ष लगे। कंप्यूटर के माध्यम से शब्दों को मात्राओं के क्रम में सजाने का कार्य **श्री ब्रजेश दास जी** ने आदरणीय श्री मुरारि चन्द्र सिन्हा जी के निर्देशन में किया। साथ ही, **श्री राजेन्द्र साह जी** ने अक्षर-संयोजन में अपना अमूल्य योगदान दिया।
"संत-साहित्य के प्रेमियों को इस शब्दकोश से लाभ पहुँचेगा—इसमें कोई संदेह नहीं।"
— छोटेलाल दास (24.6.2022 ई०)
अगला लेख: शब्दकोश का पहला शब्द 'ओम्' है। इसके बारे में विस्तार से जानने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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श्री सद्गुरु महाराज की जय 🙏
Reviewed by सत्संग ध्यान
on
जनवरी 31, 2026
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